लोहिया जी के बताए मार्ग पर चलकर समाजवाद की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है: विक्रम यादव

चंडीगढ़ | 12 अक्टूबर (विज्ञप्ति) समाजवादी चिंतक डॉ राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि चंडीगढ़ में मनाई गई। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने डॉक्टर लोहिया के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनको याद किया। इस अवसर पर “डॉ लोहिया” के जीवन पर विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें वक्ताओं ने डॉ लोहिया के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। इस अवसर पर बोलते हुए समाजवादी पार्टी चंडीगढ़ के प्रदेश महासचिव त्रिलोकी कुमार अंबेडकर ने कहा कि डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जनपद में (वर्तमान अंबेडकर नगर जनपद) अकबरपुर नामक स्थान में हुआ था उनके पिता हीरालाल अध्यापक थे और गांधी जी के अनुयाई थे। डॉ लोहिया के जीवन पर गांधी जी के जीवन का दर्शन का व्यापक प्रभाव पड़ा डॉक्टर लोहिया ने आजीवन गरीबों मजदूरों और किसानों के हितों के लिए संघर्ष किया। हम सब उनसे प्रेरणा लेकर समाज के दबे कुचले लोगों के उत्थान के लिए कार्य करें 12 अक्टूबर 1968 को उन्होंने नई दिल्ली में अंतिम सांस ली। डॉक्टर लोहिया चाहते थे कि, देश में अमीरी गरीबी की जो खाई है उसे पाटा जा सके, देश में समान शिक्षा नीति हो। डॉक्टर लोहिया ने बर्लिन से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की थी, और 9 अगस्त 1942 को जब गांधी जी भारत छोड़ो आंदोलन में गिरफ्तार हो गए तो डॉ लोहिया ने भूमिगत रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाया।

अध्यक्ष माननीय विक्रम यादव ने कहा कि “डॉ लोहिया” मात्र 57 वर्ष की कम अवधि में  एक प्रकाश पुंज की तरह भारतीय राजनीति पर अपनी अमिट छाप छोड़ गए। उनके बताए मार्ग पर चलकर समाजवाद की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। इस अवसर पर चंडीगढ़ प्रदेश के कोषाध्यक्ष राजेश कुमार, प्रदेश सचिव राधेश्याम यादव, अधिवक्ता चंद्रजीत यादव, ए. के. स्वामी सहित समाजवादी पार्टी के विजय नाथ यादव व अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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